रूबरू | Part 24 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships
लॉन में झूले के नज़दीक जाकर देखते ही वह हैरान हो गया। मायरा बेखबर सो रही थी।
उसे सोता देख वह एक टिक उसे देखने लगा। और फिर वह उसके चेहरे के पास झुक गया।
सोते हुए वह बहुत मासूम लग रही थी। उसके दिल से एक ख्वाहिश जागी। काश! मैं यूं ही इसी देखता रहा।
लेकिन दूसरे ही पल वह सीधा हो गया। वह नहीं चाहता था कि उसकी चोरी पकड़ी जाए।
वह सीधा तो हो गया लेकिन उसकी नज़र अभी भी उसी पर थी।
लॉन में हल्की हवाएं चल रही थीं। माहौल में थोड़ी ठंडक थी। एक पल को मायरा कसमसा कर थोड़ा सिकुड़ गई।
ताबिश तुरंत वहां से हटकर अंदर चला गया।
कमरे से चादर लेकर वह लॉन में आकर मायरा के ऊपर डाल देता है।
ताबिश के चादर डालते ही वह उसको खींचकर खुद को ढंक लेती है। उसकी इस हरकत पर ताबिश के होंठों पर एक खूबसूरत मुस्कान आ गई।
वह वहां से हट गया।
सुबह मायरा खुद को चादर ओढ़ कर सोता देख हैरान रह गई।
किसका यह काम हो सकता है?... हो सकता है किसी स्टाफ ने डाल दिया होगा।
वह उठकर कुछ देर तक बैठी यही सोचती रही।
फिर चादर फोल्ड करके वह अंदर चली गई। हॉल में सोफे पर चादर रखकर वह अपने कमरे में चली गई।
नाश्ता करके वापस हॉल में आई तो चादर वहां पर नहीं थी। वह दादी के कमरे में चली गई। उनको नाश्ते की टेबल पर छोड़कर वह भी नाश्ता करने चली गई।
नाश्ता करते ही वह डाइनिंग हॉल में चली गई।
दादी और ताबिश के नाश्ता करते ही ताबिश उठ खड़ा होता है। मायरा दादी की ओर देखती है। जैसे पूछ रही हो "जाऊं"
दादी भी उसका इशारा समझ कर जाने का इशारा कर देती हैं।
वह ताबिश के पीछे बाहर निकल जाती है।
चलते-चलते दोनों साथ में बराबर हो जाते हैं।
कुछ दूर चलकर मायरा रूक जाती है। जहां पर ताबिश ने उसकी आंखों पर पट्टी बांधी थी।
आज मैं देखना चाहता हूं कि तुम कितनी स्मार्ट हो। ताबिश उसे आगे चलने का इशारा करता है।
मायरा खामोशी से चलने लगती है।
उसके हर उठते कदमों के साथ ताबिश के कदम उठ रहे थे।
आफिस के दरवाज़े पर पहुंच कर मायरा रूक जाती है।
मान गए तुमको... ताबिश मुस्कुरा कर अंदर की ओर कदम बढ़ा देता है।
अपने हीरों को संभाल कर रखना। मैं कभी भी इन हीरों को चुरा सकती हूं।
अंदर पहुंच कर मायरा हीरों की ओर इशारा करती है।
तुम जो चुरा चुकी हो। उनके आगे इन हीरों की क्या हैसियत?... ताबिश धीमी आवाज़ में बोला।
क्या कहा आपने? मायरा नाराज़गी से बोली। उसे लगा उसने कुछ चुराने की बात की थी।
कुछ नहीं। तुम काम शुरू करो मैं आता हूं।
ताबिश बाहर चला गया। थोड़ी देर में उसकी बहुत ज़रूरी मीटिंग थी।
ताबिश को मायरा पर अब यह शक तो नहीं था कि वह हीरों के लिए यहां आई है। उसे अब यह पता करना था कि अगर वह हीरों के लिए नहीं आई तो फिर किस लिए आई है।
मीटिंग से वापस आकर वह सीधा मायरा के पास गया।
काम पूरा हो गया? ताबिश उसके करीब रखी चेयर पर बैठते हुए बोला।
नहीं, अभी बाकी है। मायरा की नज़रें फाइल पर थी।
तो फिर लंच कर लो। फिर काम करो। ताबिश ने घड़ी देखी।
पहले यह काम पूरा कर लूं। फिर खा लूंगी। वह काम करती रही।
ताबिश की नज़र फाइल से होते हुए उसके चेहरे पर ठहर गई। ऐसा क्या था उसमें जो उसकी नज़रों को ठहरने पर मजबूर कर रहा था।
वह उसे देखता रहा।
मायरा को ताबिश की गहरी नज़रों से उलझन होने लगी। लेकिन वह नार्मल बनी रही।
सुनो... ताबिश की नज़र अभी भी उसी पर थी।
जी, मायरा की नज़र फाइल पर रही।
तुम ने यहां तक का रास्ता कैसे तय किया? ताबिश उससे बातें करना चाहता था। इस लिए वही बात ले बैठा।
अपने कदमों से...मायरा का पूरा ध्यान अपने काम पर था।
बतलब?... ताबिश हैरान हुआ।
जितने कदम चल कर गई थी। उतने ही कदम पर वापसी हुई।
मायरा ने नज़र उठा कर उसे देखा। वह देखना चाहती थी कि उसका जवाब ताबिश पर कितना और कैसे असर करता है।
ताबिश का चेहरा एक पल के लिए हैरान हुआ। लेकिन दूसरे ही पल वह संभल गया।
तुमने केयरटेकर की जॉब क्यों चुनी? ताबिश ने जानना चाहा।
यह अभी नहीं बता सकती। मायरा ने उसकी ओर देखे बिना कहा।
आप लंच कर लें। मैं बाद में कर लूंगी। ताबिश की नज़र अपने चेहरे पर महसूस करके वह जल्दी से बोली।
तुम काम खत्म कर लो। फिर लंच करते हैं। ताबिश उठ खड़ा हुआ। और अंदर की ओर बढ़ गया।
काम खत्म करते-करते शाम हो गई।
वह ताबिश को फोन करके बताती है। और कुर्सी से उठकर अंगड़ाई लेती है। उसी वक्त ताबिश भी अंदर से आ जाता है। ऐसा लगा वह उसे के इंतेज़ार में था। वह जल्दी से हाथ नीचे करती है।
ताबिश आगे बढ़ गया। मायरा भी पीछे-पीछे चलने लगी।
हॉल में पहुंच कर ताबिश वहीं पर रूक गया। क्योंकि दादी बैठी चाय पी रही थी।
आओ तुम दोनों भी चाय पी लो।
फ्रेश होकर आता हूं दादी...
जाओ मायरा तुम भी फ्रेश होकर आ जाओ।
मैं कमरे में ही चाय पी लूंगी। कहते ही वह जाने के लिए मुड़ गई।
हर बात में अपनी वाली करना ज़रूरी है क्या?...
अगर दादी साथ चाय पीने का कह रही हैं तो पी नहीं सकती?...
ताबिश उसके साथ चलते हुए नाराज़गी से कहता है।
फ्रेश होकर हॉल में पहुंचों...ताबिश उसे हुक्म देता है।
मैं नहीं आ रही, कहते ही वह कमरे का दरवाज़ा खोलकर अंदर चली गई।
मायरा के इस तरह मना करने पर उसे बहुत तेज़ गुस्सा आया।
एक झटके से दरवाज़ा खोलकर वह अंदर चला गया। फ्रेश होकर वह दादी के पास चला गया। उनके पास आलिया को बैठा देखकर वह हैरान हुआ।
अभी कल ही तो आई थी। कल ज़रा सा भाव क्या दे दिया आज फिर हाज़िर हो गई।
इसी लिए मुझे तुम्हारी जैसी लड़कियां पसंद नहीं है।
एक मायरा है जिसे मेरे होने न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है।
उसकी आंखों के सामने मायरा का रवैया था।
वह बैठकर बातें करते हुए चाय पी रहा था। उसे उम्मीद थी उसके कहने पर न सही लेकिन दादी के लिए मायरा ज़रूर आयेगी।
इसी लिए वह बैठा आराम से चाय पीता रहा।
चाय पीते हुए वह आलिया की बातों का जवाब भी दे रहा था।
तभी उसे सामने से मायरा आती दिखाई दी। उसके होंठों पर एक भरपूर मुस्कान छा गई। जिसे उसने जल्दी से चाय की कप को होंठों से लगाकर छुपा लिया।
मायरा आकर दादी के पास वाले सोफे पर बैठ गई।
आलिया तुम दादी से बातें करो। मैं रूम में जा रहा हूं।
ताबिश उठते हुए बोला।
मैं तुम्हारे लिए ही तो आई हूं। और तुम जा रहे हो। आलिया ने मुंह बनाया।
ऐसी बात है तो मैं बैठ जाता हूं। ताबिश वापस बैठ गया।
ताबिश के इस तरह बात मानने पर आलिया हैरान थी। क्योंकि ताबिश का रवैया कुछ दिनों से उसके साथ अच्छा नहीं था। लेकिन इस वक्त ताबिश को अपनी बात मानता देख आलिया बहुत खुश हुई।
ताबिश आज बाहर डिनर करें। आलिया खुशी से बोली।
जैसा तुम्हारा हुक्म... ताबिश उसकी ओर थोड़ा सा झुका।
पूरा शान-ए-ताज हमारे लिए बुक कर दें। ताबिश तुरंत फोन पर अपने मैनेजर को हुक्म देता है।
हां पूरा रेस्टोरेंट... क्योंकि आज हमारे साथ हमारी खास मेहमान होंगी। ताबिश मुस्कुरा कर आलिया की ओर देखता है। और फोन रख देता है।
आलिया का दिल तो खुशी से झूम उठा। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि ताबिश उसके लिए इतना स्पेशल कर सकता है।
मायरा को बैठना भारी लगने लगा। वह उठकर बाहर की ओर बढ़ गई।
आलिया मैं आता हूं कहते ही ताबिश भी उठकर बाहर निकल गया।
क्या हुआ देखा नहीं गया। ताबिश तेज़ी से उसके साथ हुआ।
जारी है...
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